गुरुवार, 30 जनवरी 2014

शांत स्वभाव का पशु गैंडा


                        

गैंडा कभी झगड़े में नहीं पड़ता है। खतरे के समय वह जान बचाकर भाग निकलना ही श्रेयकर समझता है। किन्तु घायल होने पर किसी भी प्राणी से नहीं डरता और बेधड़क होकर आक्रमण करता है। गैंडा मंद बुद्धि पशु है। अकस्मात खतरे का सामना होने पर वह सोचता ही रह जाता है कि क्या करना चाहिए और यह सोच-विचार उसके लिए घातक सिद्ध होता है। मनुष्य के अतिरिक्त गेंडे को किसी पशु का डर नहीं रहता है। शेर और हाथी तक उससे दूर ही रहते हैं। गेंडे की आंखें छोटी होती हैं, और दृष्टि निर्बल होती है लेकिन उसकी सूंघने की शक्ति बहुत प्रबल होती है। भारी शरीर का होते हुए भी गैंडा खतरे के समय कई किलोमीटर तक तेजी से भाग लेता है। चीन और भारत में गेंडे के सींघ की औषधि में विशेष महत्ता मानी गई है। इस कारण सदियों से गेंडे का अनियंत्रित वध होता चला आ रहा है। वर्तमान समय में भारत और अफ्रीका में ये पशु इतने कम रह गए हैं कि उनके पूर्ण विनाश की सम्भावना है, इसलिए इन पशुओं का वध सरकार ने निषेध कर दिया है। गैंडा शाकाहारी जन्तु है। उसका प्रधान भोजन लम्बी घास है, किन्तु वह सींघ से जड़ें खोद कर भी खाता है। गैंडा उन जंगलों में रहता है, जहां लम्बी घास होती है। दिन के समय वह घंटों कीचड़ में पड़ा रहता है। दलदल या छिछले तालाबों के सूख जाने पर, वह स्थान बदल लेता है। घास के घने जंगलों में गेंडे अपने मार्ग बना लेते हैं। इन संकरे रास्तों से वे प्रतिदिन गुजरते हैं, जो लम्बी घास के झुकने के कारण सुरंग की भांति बन जाते हैं।
गैंडा इन खुफिया रास्तों से लम्बी-लम्बी दूरियां बिना देखे तय कर लेता है।

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Source – KalpatruExpress News Papper


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