रविवार, 26 जनवरी 2014

पेरेंट्स करते हैं बच्चों का होमवर्क!

                  

लंदन। लगता है मां-बाप को अब पूरी जिंदगी होमवर्क से फुर्सत नहीं मिलती। जब पढ़ते थे तब भी अपना होमवर्क करते थे, अब जब बच्चे पढ़ने लायक हो गए हैं, तो भी उनका होमवर्क पूरा कराने में मदद करते हैं। बच्चों के होमवर्क पर ब्रिटेन में एक रोचक सर्वे किया गया है। इसमें 5 से 15 साल के बच्चों के 2000 पैरेंट्स को शामिल किया गया। सर्वे में कई रोचक बातें निकल कर आईं। करीब दो तिहाई अभिभवक ने माना कि वे बच्चों को स्कूल से मिले होमवर्क को पूरा कराने में मदद करते हैं।
15 फीसदी रेग्युलर निपटाते हैं 15 फीसदी अभिभावक ऐसे थे जिन्होंने माना कि वे रेग्युलर इस काम में बच्चों की मदद करते हैं। कुछ तो पूरा का पूरा काम ही कर डालते हैं। एक दहाई ऐसे थे जो इसके पीछे अलग ही तर्क देते हैं। उनका कहना है कि बच्चों पर काम बोझ बहुत ज्यादा है। इससे उनमें झल्लाहट आने लगती है। इसी वजह से उनकी मदद करनी जरूरी हो जाती है। ऐसा न करने पर वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और जिद करने लगते हैं जिसकी वजह से उन्हें समझना भी मुश्किल हो जाता है।
42 फीसदी को लगता है धक्का बच्चों का काम तो करते हैं लेकिन इस बात की कसक कहीं न कहीं उनके मन में रह जाती है कि बच्चा काम को मैनेज नहीं कर पा रहा है।
वे यह चाहते हैं कि उनका बच्चा अपने होमवर्क में मिले काम को खुद पूरा करे। सर्वे में यह बात 42 फीसदी ने मानी कि जब उन्हें होमवर्क के बेस पर टीचर द्वारा अच्छा ग्रेड मिलता है तो खुशी होने की बजाए धक्का लगता है। उन्हें लगता है कि यह ग्रेड बच्चे को मिली जरूर है लेकिन उसके काम के बेस पर नहीं। इनमें से 18 फीसदी डरे रहते हैं कि कहीं टीचर सच्चाई पकड़ न ले। ऐसा होने पर बच्चे को सजा मिल सकती है। कईयों को आश्चर्य होता है कि टीचर काम के आधार पर भी नहीं पकड़ पाते हैं।
बच्चे तो खुश रहते हैं सर्वे में 70 फीसदी अभिभावक ने माना कि उनका बच्चा इस बात से खुश रहता है कि हम उसका कर रहे हैं। वह आराम से बैठे हमें काम करते देखते हैं और खुद फ्री रहते हैं। उनका कभी यह मन नहीं करता कि हम अपने होमवर्क अपने आप करें। हालांकि उनका यह भी मानना है कि यह तरीका गलत है और बच्चे की ऐसी ही आदत डिवेलप हो जाती है। यह आगे के लिए ठीक नहीं है। इसलिए वे यह चाहते हैं कि उनके बच्चे खुद काम करें ताकि उनकी आदत सही रहे भविष्य में कोई परेशानी न हो। अभिभावक यह मानते हैं कि अपना काम खुद न करने की आदत बच्चों को आलसी और कामचोर बनाती है इसलिए उनमें अच्छी आदत डेवलप होनी चाहिए न कि बुरी लेकिन वे बच्चों को इसके लिए तैयार नहीं पाते और बच्चों की खुशी के लिए न चाहते हुए भी स्वयं उनका होमवर्क पूरा करते रहते हैं।

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Source – KalpatruExpress News Papper


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