सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

वनमानुष


                         

रोचक जानकारी
गोरिल्ला, चिम्पैन्जी, बबून और गिब्बन वनमानुष जाति के बंदर हैं। इनकी दुम नहीं होती है और वे मनुष्य की तरह दो पैरों पर शरीर को साध कर चल सकते हैं। इसी कारण इस जाति के बंदरों को वनमानुष कहा जाता है।
भारत में पाए जाने वाले वनमानुष को हुक्कू बंदर कहते हैं। यह असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से लेकर बंगला देश, म्यांमार और दक्षिण चीन के सदा-हरित वनों में पाया जाता है। भारत के लगभग हर चिड़ियाघर में इसको देखा जा सकता है। इनका का रंग काला होता है लेकिन वयस्क होने पर मादा हुक्कू के शरीर के बालों का रंग भूरा हो जाता है। इनकी बांहें लंबी और मजबूत होती हैं जिनकी सहायता से यह पेड़ों पर झूलते हुए लंबी लंबी दूरियां तय करते हैं। अपने दल से बात करने या उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए यह हुक्कू-हुक्कू की जोरदार आवाज करता है। इसीलिए इसका नाम हुक्कू बंदर रखा गया है। हर बंदर की तरह इसका प्रमुख भोजन फल है लेकिन यह पत्तियां, कंदमूल, अंडे और मकड़ियों को भी शौक से खाते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग तीन फुट और वजन छह से आठ किलो तक होता है।
चिंपैंजी जाति के वनमानुष सबसे बुद्धिमान समङो जाते हैं। वे अपने भोजन के लिए कीड़े मकोड़े तलाश करने के लिए पत्थर या लकड़ी को औजार की तरह इस्तेमाल करते है। बबून जाति की मादा खतरे का आभास होते ही छोटे बच्चों को लेकर पेड़ों व सुरक्षित स्थान पर जा बैठती है जबकि नर खतरे का सामना करते हैं। सभी जातियों के वनमानुष एकदूसरे के बदन से गन्दगी को हटाकर बालों की सफाई करने में एकदूसरे की मदद करते हैं जिसे वे प्यार जताना भी समझते हैं। वे दो से पांच तक के दल में रहते हैं, सांकेतिक भाषा बोलते हैं और अपने खास संकेतों से वे परिवार में एक दूसरे के साथ संपर्क बनाए रखते हैं।
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Source – KalpatruExpress News Papper

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