मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

नकली हाथ, असली काम



वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृत्रिम हाथ बनाया है जो विकलांगों को असली अंग जैसा अहसास देता है। इटली में डेनमार्क के एक व्यक्ति को सर्जरी के बाद ऐसा हाथ लगाया गया है जो उसकी बाजू के ऊपरी हिस्से की नसों से जुड़ा है।
डेनिस आबो ने एक दशक पहले आतिशबाजी में अपना हाथ गंवा दिया था। उन्होंने इस बायोनिक हाथ को अद्भुत बताया है। प्रयोगशाला में हुए परीक्षण में उन्हें आंख पर पट्टी बांधकर चीजें थमाई गईं और इस हाथ की मदद से वह इन चीजों के आकार और कड़ेपन को जानने में सफल रहे। इस बारे में साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन ने विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है एक अंतरराष्ट्रीय दल ने इस शोध परियोजना में हिस्सा लिया था, जिसमें इटली, स्विटरजरलैंड और जर्मनी के रोबोटिक्स विशेषज्ञ शामिल थे।
इकोल पॉलीटेक्नीक फेडेरेल डी लुसाने और स्कूओला सुपीरिओर सेंट अन्ना, पीसा के प्रोफेसर सिल्वेस्त्राे मिकेरा ने कहा, यह पहली बार हुआ है जब किसी विकलांग को नकली हाथ में संवेदना का अहसास हुआ है। इस बायोनिक हाथ में न केवल एडवांस वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है बल्कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं जो मस्तिष्क को संदेश भेजते हैं। मिकेरा और उनकी टीम ने इस कृत्रिम हाथ में ऐसे संवेदक लगाए जो किसी चीज को छूने पर उसके बारे में सूचना देते हैं। कम्प्यूटर एल्गोरिदम के इस्तेमाल से वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रिकल संकेतों को एक ऐसी उत्तेजना में बदला जिसे संवेदी तंत्रिकाएं समझ सकें।
रोम में ऑपरेशन के दौरान मरीज के बाजू के ऊपरी हिस्से की तंत्रिकाओं में चार इलेक्ट्रोड जोड़े गए। ये इलेक्ट्रोड कृत्रिम हाथ की उंगलियों के संवेदकों से जुड़े थे जो छूने और दवाब के फीडबैक को सीधे मस्तिष्क को भेजते हैं।
36 साल के आबो ने एक महीना प्रयोगशाला में बिताया।
प्रयोगशाला में पहले तो इस बात की जांच की गई कि इलेक्ट्रोड काम कर रहे हैं या नहीं। फिर यह देखा गया कि ये बायोनिक हाथ से पूरी तरह जुड़े हैं या नहीं। उन्होंने कहा, मजेदार बात यह है कि इसके सहारे मुङो बिना देखे ही छूने से चीजों का अहसास हो जाता है। मैं अंधेरे में भी इसका इस्तेमाल कर सकता हूं। यह बायोनिक हाथ अभी शुरुआती चरण में है और सुरक्षा कारणों से आबो का एक और ऑपरेशन करना पड़ा ताकि संवेदकों को हटाया जा सके।
बायोनिक हाथ को विकसित करने वाली टीम अब इस प्रयास में जुटी है कि इसे छोटा कैसे बनाया जाए ताकि इसे घर में इस्तेमाल किया जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस हाथ के व्यावसायिक इस्तेमाल में एक दशक तक का समय लग सकता है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में कृत्रिम अंगों का रास्ता साफ होगा जो वस्तुओं और तापमान का पता बता सकेंगे। बहरहाल आबो को उनका पुराना कृत्रिम हाथ मिल गया है और वह भविष्य में इसे बायोनिक हाथ से बदलने को तैयार हैं।
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Source – KalpatruExpress News Papper

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