मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

विश्व की सबसे बड़ी आउटडोर एग्जीबिशन



स्कल्प्चर बॉय द सीकला को लोगों तक पहुंचाने का एक बेहद सफल एवं नायाब तरीका साबित हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई शहर सिडनी के करीब बोंडी एवं तामारामा समुद्र तट का दो किलोमीटर लम्बा हिस्सा पर्यटकों में पैदल सैर के लिए बेहद लोकप्रिय है। यहीं पर समुद्र किनारे हर साल स्कल्प्चर बॉय द सीनामक एक अद्भुत कला प्रदर्शनी आयोजित की जाती है जिसके तहत खुले तट पर जगह-जगह नए तथा दिग्गज कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित होती हैं।
तीन सप्ताह तक आयोजित होने वाली इस कला प्रदर्शनी को देखने हर साल करीब 5 लाख दर्शक पहुंचते हैं। लोग समुद्र तट पर सैर-सपाटा करते हुए इन कलाकृतियों को निहारने का लुत्फ उठाते हैं।
इसे दुनिया की सर्वाधिक विशाल आऊटडोर एग्जीबिशन भी कहा जाता है जिससे प्रेरित होकर ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर स्थित शहर पर्थ तथा डेनमार्क के बंदरगाह शहर आरहस में भी समुद्र तटों पर ऐसी ही कला प्रदर्शनियां आयोजित की जाने लगी हैं।
स्कल्प्चर बॉय द सीमें नवम्बर 2013 में करीब 100 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई थीं जिनमें से आधी विदेशी कलाकारों, कुछ पहली बार हाथ आजमाने वालों और कुछ प्रतिष्ठित कलाकारों की कलाकृतियां इनमें शामिल थीं।
प्रदर्शनी को देखने के लिए ब्रिटेन से यहां आई एक आर्ट टीचर कैरोल ऐशबे के अनुसार, ‘यहां कलाकृतियों की बड़ी संख्या भी एक वजह है कि लोग इनके प्रति काफी अधिक आकर्षित हो रहे हैं। यहां किसी उत्सव जैसा माहौल है।इस अद्भुत प्रदर्शनी को आयोजित करने का विचार 17 साल पहले डेविड हैंडले नामक एक संयोजक को सूझ था। 1997 में प्रदर्शित की गई कलाकृतियां महज एक दिन ही टिक सकी थीं जिन्हें स्वयंसेवियों के प्रयास से स्थापित किया गया था। आज भी यह एक नि:शुल्क आयोजन है परंतु कार्पोरेट प्रायोजकों की वजह से अब इसका स्तर काफी ऊंचा उठ चुका है। डेविड को इस नायाब प्रदर्शनी का विचार चैक शहर प्राग में सूझ था जहां उन्होंने तेरहवीं सदी के अवशेषों की पृष्ठभूमि में आयोजित एक प्रदर्शनी देखी थी।
बेशक ऑस्ट्रेलिया में प्राचीन स्मारकों की कमी हो, वहां नैसर्गिक सौंदर्य और खूबसूरत समुद्र तटों की कोई कमी नहीं है इसलिए उन्होंने प्रदर्शनी के लिए समुद्र तट को चुनने का फैसला किया।
सिडनी के अरुण शर्मा, जो इस प्रदर्शनी के अलावा डेनमार्क के शहर आरहस में अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कर चुके हैं, का कहना है कि डेविड की इस प्रदर्शनी की सफलता का राज इन तक लोगों की आसान पहुंच बनाना रहा है। लोग आराम से तट पर टहलते हुए इन कलाकृतियों को निहार सकते हैं। अधिकतर लोग मूर्तिकला या विशाल कलाकृतियों को देखने के लिए खासतौर पर किसी कलादीर्घा तक जाने की जहमत नहीं उठाना चाहते। वैसे भी कई लोग विशालकाय कलाकृतियों को अपने घर में सजा नहीं सकते हैं।
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Source – KalpatruExpress News Papper

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