गुरुवार, 6 मार्च 2014

दोस्ती


 शहर से दूर जंगल में एक पेड़ पर गोरैया का जोड़ा रहता था। उनके नाम थे, चीकू और चिनमिन। दोनों बहुत खुश रहते थे। सुबह-सवेरे दोनों दाना चुगने के लिये निकल जाते। शाम होने पर अपने घोसले में लौट जाते। कुछ समय बाद चिनमिन ने अंडे दिये।
चीकू और चिनमिन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दोनों ही बड़ी बेसब्री से अपने बच्चों के अंडों से बाहर निकलने का इंतजार करने लगे।
अब चिनमिन अंडों को सेती थी और चीकू अकेला ही दाना चुनने के लिये जाता था।
एक दिन एक हाथी धूप से बचने के लिये पेड़ के नीचे आ बैठा। मदमस्त होकर वह अपनी सूंड़ से उस पेड़ को हिलाने लगा। हिलाने से पेड़ की वह डाली टूट गयी, जिस पर चीकू और चिनमिन का घोसला था। इस तरह घोसले में रखे अंडे टूट गये।
अपने टूटे अंडों को देख कर चिनमिन जोरों से रोने लगी। उसके रोने की आवाज सुनकर, चीकू और चिनमिन का दोस्त भोलू उसके पास आया और रोने का कारण पूछने लगा।
चिनमिन से सारी बात सुनकर उसे बहुत दुख हुआ।
फिर दोनों को धीरज बंधाते हुए भोलू बोला, अब रोने से क्या फायदा, जो होना था सो हो चुका।
चीकू बोला, भोलू भाई, बात तो तुम ठीक कर रहे हो, परंतु इस दुष्ट हाथी ने घमंड में आकर हमारे बच्चों की जान ले ली है। इसको तो इसका दंड मिलना ही चाहिये। यदि तुम हमारे सच्चे दोस्त हो तो उसको मारने में हमारी मदद करो।
यह सुनकर थोड़ी देर के लिये तो भोलू दुविधा में पड़ गया कि कहां हम छोटे-छोटे पक्षी और कहां वह विशालकाय जानवर। परंतु फिर बोला, चीकू दोस्त, तुम सच कह रहे हो। इस हाथी को सबक सिखाना ही होगा। अब तुम मेरी अक्ल का कमाल देखो। मैं अपनी दोस्त वीना मक्खी को बुला कर लाता हूं। इस काम में वह हमारी मदद करेगी।
और इतना कहकर वह चला गया।
भोलू ने अपनी दोस्त वीना के पास पहुंचकर उसे सारी बात बता दी। फिर उसने उससे हाथी को मारने का उपाय पूछा। वीना बोली, इससे पहले कि हम कोई फैसला करें, अपने मित्र मेघनाद मेंढक की भी सलाह ले लूं तो अच्छा रहेगा। वह बहुत अक्लमंद है। हाथी को मारने के लिये जरूर कोई आसान तरीका बता देगा। चीकू, भोलू और वीना, तीनों मेघनाद मेंढ़क के पास गये। सारी बात सुन कर मेघनाद बोला, मेरे दिमाग में उसे मारने की एक बहुत ही आसान तरकीब आयी है।
वीना बहन सबसे पहले दोपहर के समय तुम हाथी के पास जाकर मधुर स्वर में एक कान में गुंजन करना। उसे सुनकर वह आनंद से अपनी आंखे बंद कर लेगा। उसी समय भोलू अपनी तीखी चोंच से उसकी दोनो आंखें फोड़ देगा। इस प्रकार अंधा हो कर वह इधर-उधर भटकेगा।
थोड़ी देर बाद उसको प्यास लगेगी तब मैं खाई के पास जाकर अपने परिवार सहित जोर-जोर से टर्र-टर्र की आवाज करने लगूंगा। हाथी समङोगा की यह आवाज तालाब से आ रही है। वह आवाज की तरफ बढ़ते-बढ़ते खाई के पास आयेगा और उसमें जा गिरेगा और मर जाएगा।
सबको मेघनाद की सलाह बहुत पसंद आयी। जैसा उसने कहा था, वीना और भोलू ने वैसा ही किया। इस तरह छोटे छोटे जीवों ने मिलकर अपनी अक्ल से हाथी जैसे बड़े जीव को मार गिराया और फिर से प्यार से रहने लगे।
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By-प्रमिला गुप्ता
Source – KalpatruExpress News Papper






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