मंगलवार, 4 मार्च 2014

अब गूगल कराएगा ताजमहल का ‘ऑनलाइन दीदार’


 आप कभी अपने साथी को दुनिया में किसी के प्यार की बेमिसाल निशानी माने जाने वाले ताजमहल ले जाना चाहें तो क्या करेंगे? आपके पास बस, ट्रेन या हवाई जहाज का विकल्प हो सकता है लेकिन जल्द ही आप ताजमहल की सैर वचरुअल दुनिया में ऑनलाइन भी कर सकेंगे। गूगल की यह खास पेशकश है। भारत के संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर गूगल ताजमहल सहित देश के 99 अन्य ऐतिहासिक महत्त्व की जगहों की मैपिंग कर रहा है ताकि इंटरनेट यूजर ऑनलाइन जाकर ताजमहल के आस पास की इमारतों से लेकर इसकी एकएक दीवार तक से रूबरू हो सकें।
ताजमहल कई लिहाज से खास है।
दुनिया भर में इसे शोहरत हासिल है।
हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्होंने ताजमहल केवल फिल्मों और तस्वीरों में देखा है। गूगल और भारतीय संस्कृति मंत्रालय की कोशिश है कि लोग ताजमहल के दीदार का लुत्फ ऑनलाइन भी उठा सकें।
तकनीकी जुगलबंदी कहते हैं कि सहर की धूप में ताजमहल और भी अधिक हसीन लगता है और यमुना नदी के किनारे जब सूरज ढल रहा होता है तो सफेद संगमरमर की इस आलीशान इमारत के साथ दुनिया भर के चाहने वालों की दास्तान, यहां की फिजा में घुल सी जाती है।
इस इमारत की उम्र कोई 360 साल की हुई होगी और अब ताजमहल 21वीं सदी की तकनीक के साथ जुगलबंदी करने जा रहा है। 21वीं सदी की इस तकनीक का नाम गूगल ट्रैकर है। यह एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें ताजमहल की वीडियो फुटेज इकट्ठा की जा रही है ताकि इसे जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सके। गूगल ट्रैकर का इस्तेमाल पहले भी ग्रांड कैनन और दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा का ऑनलाइन संस्करण तैयार करने में किया जा चुका है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या भारत में गूगल इस तरह की कोशिश पहली बार कर रहा है? साल 2011 में गूगल ने भारत के बेंगलुरू शहर की सड़कों की मैपिंग करने की कोशिश की थी लेकिन सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर यह परियोजना बाद में रोक दी गई।
सांस्कृतिक संरक्षण सुरेन रुहेला गूगल के प्रोडक्ट मैनेजर हैं। इस परियोजना पर वह कहते हैं, हम इन ऐतिहासिक धरोहरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं और ये रिकॉर्ड हमेशा रहेंगे। यह केवल इस पीढ़ी के लिए नहीं होगा बल्कि आने वाली कई पीढ़ियां भी इसे देख सकेंगी।
यह एक देश की संस्कृति के संरक्षण का बढ़िया तरीका है। लेकिन भारत में गूगल के स्ट्रीट व्यू तकनीक या सड़कों और गलियों की वास्तविक तस्वीरों के ऑनलाइन संस्करण तैयार करने की परियोजना को लेकर सुरक्षा चिंताएं बरकरार हैं।
भारत में स्ट्रीट व्यू के वीडियो फुटेज लेने पर रोक है और मुश्किल यह है कि गूगल की तकनीक इसी पर आधारित है। सुरेन कहते हैं, हम संबंधित सरकारी महकमों के साथ इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा चिंताओं को समझने और उसे सुलझने की कोशिश कर रहे हैं। मुङो पूरा भरोसा है कि वक्त रहते हम इस मुद्दे को सुलझ लेंगे और भारत में इंटरनेट यूजर्स इनका ऑनलाइन नजारा देख सकेंगे। यह गूगल का एक बेहतरीन प्रोडक्ट है जिसे दुनिया भर में सराहा गया है।
गूगल का कैमरा गूगल ट्रेकर काम कैसे करता है,यह भी जानना जरूरी है। पीठ पर लटकाए जाने वाले बैकपैक में एक कैमरा बंधा होता है, जिसे आप पहन सकते हैं। इसे चालू करने के लिए किसी के मदद की जरूरत पड़ती है और यह बेहद भारी भी है। गूगल ट्रैकर में लगा कैमरा 40 पाउंड या तकरीबन 18 किलो का होता है और जैसे ही आप इसे चालू करते हैं, कैमरे के 15 लेंस अलग अलग दिशाओं में तस्वीरें लेना शुरू कर देते हैं। फिर एक कम्प्यूटर के जरिए इन तस्वीरों को एक साथ कुछ इस तरह से जोड़ा जाता है कि देखने वाले किसी जगह को 360 डिग्री के कोण से देख सकें। इसे ऑनलाइन देखने पर आपको ऐसा लगेगा मानो आप उस गली में घूम रहे हैं। ताजमहल के सभी हिस्सों में सैलानियों को जाने की इजाजत नहीं है लेकिन गूगल ट्रैकर पर ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई है।
गूगल का कैमरा वहां भी जा सकता है, जहां पर्यटक नहीं जा सकते। ताज परिसर बड़े इलाके में फैला हुआ है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत में ऐतिहासिक महत्व की इमारतों का संरक्षक है। उसे को उम्मीद है कि इस परियोजना से ज्यादा से ज्यादा लोग ताजमहल की ओर आकर्षित होंगे।
बेमिसाल इमारत ताज के संरक्षक मुनज्जर अली कहते हैं, इससे लोगों को फायदा होगा।
गूगल ट्रैकर के कैमरे को बंद कमरों में जाने की इजाजत दी जाएगी, वह पूरे परिसर में कहीं भी जा सकता है।
मकबरे के भूतल तक भी उसकी पहुंच होगी ताकि लोग ताजमहल का पूरी तरह से दीदार कर सकें,जैसा उन्होंने पहले कभी भी नहीं किया होगा। माना जाता है कि दुनिया भर से हर साल 80 लाख से ज्यादा सैलानी ताजमहल देखने आते हैं। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में यह मकबरा बनवाया था, जिसे उनकी बेमिसाल मोहब्बत की निशानी के तौर पर दुनिया देखती है। ताजमहल देखने आए लोगों का मानना है कि यह बेहद खूबसूरत है। कई लोग इसे देखने का सपना संजोए हुए रहते हैं और जब इससे रूबरू होते हैं तो पाते हैं कि यह उनके ख़्वाबों से कहीं ज्यादा खूबसूरत है।
इस बार भी लाखों सैलानी ताजमहल देखने आएंगे और रोज गुजर जाने वाले दिन के बाद रात की रोशनी में भीगी सफेद संगमरमर की यह इमारत ङिालमिलाती रहेगी।
लेकिन तकनीक के द्वारा इस इमारत को अब और अधिक लोग देख सकेंगे। (साभार: बीबीसी)
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Source – KalpatruExpress News Papper

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